नोएडा में बिल्डरों और अथॉरिटी की लड़ाई में करीब 8,000 फ्लैट बायर्स फिर फंस गए हैं। 21 हाउसिंग प्रोजेक्ट्स की रजिस्ट्री पर रोक लगी हुई है। वजह—बिल्डरों ने तय किस्तें जमा नहीं कीं।
तीन महीने पहले नोएडा अथॉरिटी ने इन प्रोजेक्ट्स की NOC रोक दी थी। अमिताभ कांत पॉलिसी लागू होने के बाद खरीदारों को राहत की उम्मीद थी। शुरुआत में करीब 4,400 फ्लैटों की रजिस्ट्री भी हुई, लेकिन अब प्रक्रिया फिर धीमी पड़ गई है।
दरअसल, यूपी सरकार ने दिसंबर 2024 में लंबे समय से अटके हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को पूरा कराने के लिए अमिताभ कांत पॉलिसी लागू की थी। नोएडा के 57 प्रोजेक्ट्स इसमें शामिल किए गए। इनमें 36 बिल्डरों ने अथॉरिटी से समझौता किया।
शर्त थी कि बिल्डर पहले 25% बकाया जमा करेंगे। इसके बाद रजिस्ट्री के लिए NOC मिलेगी। बाकी 75% रकम किस्तों में जमा करनी थी। लेकिन 21 प्रोजेक्ट्स के बिल्डर अगली किस्तें समय पर नहीं दे सके। इसके बाद फरवरी में उन्हें डिफॉल्टर घोषित कर दिया गया।
रजिस्ट्री रुकने से खरीदारों की परेशानी बढ़ गई है। कई लोगों का कहना है कि वर्षों की जमा पूंजी लगाने के बावजूद उन्हें अब भी मालिकाना हक नहीं मिला।
इम्पीरियल हाउसिंग, नेक्सजेन इफाकॉन, लॉरिएट बिल्डवेल, गुलशन होम्स, स्काईटेक कंस्ट्रक्शन, सनवर्ल्ड रेजीडेंसी, गार्डेनिया शेल्टर्स, जेएम हाउसिंग, प्रतीक बिल्डटेक और ओमेक्स ग्रुप समेत कई बड़े प्रोजेक्ट्स इस विवाद से प्रभावित हैं।