30 साल से लंबित महिला आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। 2026 में पेश संशोधन बिल का लक्ष्य संसद और विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देना है, लेकिन यह अब भी राजनीतिक विवाद में फंसा हुआ है।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम के बावजूद लागू होने में देरी क्यों? क्या परिसीमन और राजनीति के कारण महिलाओं का प्रतिनिधित्व फिर टल जाएगा?
संसद में महिलाओं की भागीदारी अभी भी सिर्फ लगभग 14% है। ऐसे में सवाल बड़ा है—क्या यह बदलाव वाकई आएगा या फिर यह मुद्दा फिर टल जाएगा?
🎯 यह सिर्फ एक बिल नहीं, बल्कि बराबरी और प्रतिनिधित्व की लड़ाई है।
👉 आपकी क्या राय है—महिला आरक्षण तुरंत लागू होना चाहिए या पहले सुधार जरूरी है? कमेंट में बताइए!