उत्तर प्रदेश में खाने वाले तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज हुआ है।
पिछले 10 दिनों में रिफाइंड और सरसों तेल के दाम 7 से 12 रुपये प्रति लीटर तक बढ़े हैं। थोक बाजार में सरसों तेल 132 से बढ़कर 140 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया। सूरजमुखी समेत अन्य तेल भी 10-15 रुपये तक महंगे हुए हैं।
इस बढ़ोतरी की बड़ी वजह पश्चिम एशिया का तनाव है। कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल पार कर गई है। इससे बायोडीजल उत्पादन बढ़ा है।
इंडोनेशिया ने पाम ऑयल का बड़ा हिस्सा घरेलू ईंधन में खपाना शुरू किया है। निर्यात घटा है। इससे वैश्विक बाजार में पाम ऑयल महंगा हुआ है। इसका सीधा असर रिफाइंड, सोयाबीन और सूरजमुखी तेल पर पड़ा है।
मध्य-पूर्व संघर्ष से शिपिंग रूट भी प्रभावित हैं। मालभाड़ा करीब 25% बढ़ गया है। डॉलर की मजबूती ने आयात और महंगा कर दिया है। कुल मिलाकर तेल उद्योग की लागत 20-25% बढ़ी है।
उत्तर प्रदेश में सालाना करीब 500 करोड़ लीटर खाद्य तेल की खपत होती है। औसतन 10 रुपये प्रति लीटर बढ़ोतरी से उपभोक्ताओं पर लगभग 5000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ा है।
विशेषज्ञों का कहना है—अगर अंतरराष्ट्रीय हालात ऐसे ही रहे, तो कीमतें और बढ़ सकती हैं।